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मरीज लगातार निजी अस्पतालों की मानसिक गिरफ्त के शिकार हो रहे हैं।
- Repoter 11
- 27 Mar, 2025
समस्तीपुर में स्वास्थ्य सेवाएं यहा मरीजों के लूट का तरीका बन गई है। लोग अपने या अपनों को बचाने के लिए निजी नर्सिंग होम प्राइवेट क्लनिक और चिकित्सकों के हवाले स्वयं को कर रहे हैं।नतीजा यह हो रहा है कि इलाज के नाम पर उन्हें दोनों हाथों से लूटा जा रहा है। समस्तीपुर के प्राइवेट हॉस्पिटलों में लूट मची है। सरकार का आदेश साइडलाइन कर हॉस्पिटल अपनी गाइडलाइन चला रहे हैं। मरीजों की जेब और जान से खेल रहे हैं।निजी क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था प्रत्येक चरण पर महंगी है। यदि आप बीमार हुए तो हाथ से खून और जेब से रुपये एक साथ निकालना पड़ेगा। फिर भी भरोसे का इलाज संभव नहीं है। निजी अस्पतालों में बीमारियों की जांच के नाम पर भी बड़ा खेल हैं। एक पैथोलॉजी की रिपोर्ट दूसरे जगह मान्य नहीं होती है। जहां दिखाओ वहां अलग से जांच कराओ, तभी चिकित्सक दवा लिख रहे हैं। फायदा नहीं हुआ तो सभी खर्चे व्यर्थ हो जाएंगे। नए चिकित्सक के पास जाएंगे तो जांच फिर से करानी पड़ेगी।जिले में खून जांच के लिए पैथोलॉजी की बाढ़ आ गई है। मुख्यालय से लेकर ग्रामीण अंचल के सरकारी अस्पतालों के आसपास कई-कई पैथोलॉजी हैं। वहीं निजी अस्पतालों में भी खून जांच के सेंटर खोले गए हैं। सभी सेंटरों की अलग-अलग सेटिंग है। यदि किसी डॉक्टर की सलाह पर उनके बताए हुए पैथोलॉजी में आप खून की जांच करा लिए हैं और वह रिपोर्ट लेकर दूसरे डॉक्टर के पास पहुंच गए तो यह मान्य नहीं होगा। आपको फिर संबंधित चिकित्सक के बताए हुए पैथोलॉजी सेंटर पर दोबारा जांच करानी पड़ेगी।जानकार इसके पीछे सेटिंग का खेल बता रहे हैं। उनका कहना है कि मरीज के इलाज में सिर्फ परामर्श शुल्क और दवाओं में कमीशन से ही रुपये नहीं कमाए जाते हैं। जांच में भी आधे की हिस्सेदारी बनती है। इस वजह से चिकित्सक अपनी सेटिंग के पैथोलॉजी की जांच रिपोर्ट को सही ठहराते हैं। खून की जांच भी महंगे दर पर हो रही है। बुखार, खांसी, पेट दर्द, गैस, भूख न लगने जैसी शिकायत पर चिकित्सक अमूमन मलेरिया, निमोनिया, पीलिया, सीबीसी, एलएफटी, केएफटी, शुगर आदि जांच पर्चे पर लिख दे रहे हैं।
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